विचार वान

 व्यक्ति को कुछ भी करने से पहले सही या गलत का विचार करना बहुत जरूरी है।  मनुष्य और पशु में यही अन्तर है। मनुष्य को भगवान ने विचार करने की शक्ति दी है,  बुद्धि दी है और पशु के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है। 


कभी देखा है पशु को डिप्रेशन में या चिंता करते हुए, पशु तो विचार हीन जीवन जीता है।  मगर जब कोई इंसान गलत काम करता है बिना विचारे बिना सोचे समझे तो क्या वो पशु समान नहीं हैं। जानवर इन्द्रियों का दास होता है और मानव इन्द्रियों का स्वामी। क्योंकि भगवान ने उसे विवेक दिया है।  फिर भी अगर मानव विवेकहीन होकर काम करता है तो वह भी जानवर ही है 

जो मनुष्य परिवार में मुखिया होता है जिससे पूरा परिवार जुड़ा रहता है ऐसे मनुष्य को तो बहुत सावधानी से निर्णय लेने की आवश्यकता है क्योंकि उसके फैसले का प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जितना बड़ा मुखिया का अधिकार होता है,  उसका कर्तव्य भी उतना बड़ा होता है। 

मुखिया केवल अधिकार का उपयोग ही नहीं,  कर्तव्यों का पालन भी उचित प्रकार से करना चाहिए। अगर मुखिया ही विचार हीन और  दम्भी होगा तो उसकी वज़ह से पूरा परिवार, समाज को कष्ट होता है।  ऐसा नहीं होना चाहिए। 

व्यक्ति का गलत काम केवल परिवार या समाज या देश को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि पूरी प्रकृति उससे प्रभावित होती है।  जब प्रकृति पर इसका बुरा असर पड़ता है तो प्रकृति मनुष्य के लिए बहुत खतरनाक असर छोड़ती है। या ऐसे कहें कि प्रकृति मानव समाज के लिए बहुत प्रतिकूल हो जाती है। 

और अगर कोई व्यक्ति कोई शुभ कार्य करता है या शुभ संकल्प करता है तो देखिए मानव या समाज ही नहीं पूरी प्रकृति कितनी सकारात्मक उर्जा उत्पन्न करती हैं।  और कहीं भी,  किसी भी रूप में प्रकृति मानवता के लिए वरदान बन जाती है। 


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