मध्यस्थ

 


सुख दुख धूप छाओ ये सब जिंदगी के रंग है जिंदगी के हिस्से है इनसे दूर भागने के बजाय इनका सामना करो। 

कुछ लोग मानसिक रूप से इतने कमजोर होते हैं कि यदि कोई गहरी समस्या आजाये तो ऐसे किसी ज्ञानी पंडित के पास पहुंच जायेगी इस आशा के साथ की वो उनकी सारे दुख दूर कर देगा। उनके दुख का सही कारण बता देगा जेसे तो वो भगवान का भेजा हुआ कोई दूत है। कुछ को तो अपना भविष्य जानने का इतना शौक रहता है कि वह भी ऐसे ज्ञानियों को तलाश लेते हैं। इंसान और भगवान के बीच में मध्यस्थ है कोन!

इंसान खुद ही ऐसे लोगों को अपनी जिंदगी में आमंत्रित करते हैं ऐसे ज्ञानियों को बढ़ावा देते हैं।  खुद का ही शोषण करवाने के लिए जब कि हकीकत ना इंसान जनता है ना वो ज्ञानी। ऐसे इंसान भी मानसिक बीमार है और ऐसे ज्ञानी भी मानसिक बीमार है। जो अपने आपको इंसान और भगवान के बीच मध्यस्थ बनकर सब को गुमराह करते हैं। 


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