आराधना
दुनिया में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं अलग अलग धर्म है अलग अलग ही मान्यताएँ है। लेकिन जिस भी धर्म में जिस भी भगवान पर विश्वास हो, इस विश्वास का आधार क्या है।भगवान को लोग क्यों पूजते है। भगवान के प्रति आस्था की श्रद्धा की सबकी वज़ह अलग अलग है। भावना भी अलग है।
कुछ लोग मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान को पूजते है कुछ सुख के लिए कुछ शोहरत के लिए, कुछ दौलत के लिए और कुछ तो दूसरों को हराने के लिए खुद को विजय के लिए और कुछ अज्ञानी तो दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए भगवान को पूजते है।
सबसे पहले तो ये सोचिए कि क्या भगवान से आप कुछ पाने के लिए सिर्फ इसलिए पूजते है कि वो भगवान है दाता है। देने वाला है। या ये सोचकर कि वो शक्तिशाली है सर्वशक्तिमान है, इसीलिए पूजा करते हैं। भगवान को क्या मानकर, भगवान के प्रति क्या भाव लेकर आप भगवान को पूजते है।
अगर भगवान देना बंद कर दे आपकी इच्छा पूरी ना करें तो क्या भगवान को पूजना छोड देगे। छोड ही देंगे अगर आपकी पूजा का आधार यही है तो यही होगा।
जिस भी भगवान में आपकी श्रद्धा है तो उस श्रद्धा उस विश्वास को पवित्र बनाओ। उसे कोई सांसारिक इच्छा का आधार मत दो। भगवान को गहराई से पहचानने की कोशिश करो हालाकि भगवान को पूरी तरह से तो भगवान ही जानता है। फिर भी भगवान के गुण, भगवान की महिमा, भगवान की करुणा, भगवान का स्वभाव को थोड़ा भी जान ले तो भगवान के चरणों में ऐसा विश्वास अटूट हो जाएगा कि हमारे साथ चाहे अच्छा हो रहा हो या बुरा, जो भी हो सही ही होगा।
भगवान सर्वशक्तिमान है या भगवान देने वाला है सिर्फ इसी वज़ह से भगवान को नहीं पूजना चाहिए। अरे! भगवान सर्वशक्तिमान होकर भी, सब कुछ करने की ताकत रख कर भी सिर्फ भक्तों के प्रेम वश भक्तों के क्या क्या कष्ट सहन करने को तैयार हो जाते हैं। भगवान के आदर्श कितने ऊँचे है भगवान के गुणगान के लिए शब्द ही कम पड़ रहे हैं। भगवान को तो निष्काम भाव से पूजना ही उसकी सच्ची आराधना है।
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