पहचान

 इंसान का स्वभाव कितनी विचित्रता से भरा हुआ है।  जिंदगी में हम यदि इंसान के यह विविध रूप नहीं देखते तो जिंदगी को गहराई से पूर्णत कभी समझ नहीं पाते। 

हमे अक्सर यह लगता है हमे कोई समझता नहीं है, हमे कोई पहचानता नहीं है। पर सत्य तो यह है कि सही से तो हम खुद भी अपने आप को सही से नहीं समझ पाते।

एक भगवान ही तो है जो हमे अच्छी तरह से समझता है और पहचानता है। व्यक्ती अपने जीवन में अनगिनत झूठ बोलता है।  दूसरों से झूठ बोलना बुरा है मगर खुद से झूठ बोलना खतरनाक है। खुद से ही झूठ बोलकर खुद को भ्रमित कर के इंसान जीवन में हार या दुख के अलावा कुछ नहीं प्राप्त करता। कम से कम खुद को पहचानो,  अपने सत्य को जानो। उस परम सत्य की शरण में जाओ जो हमे इस योग्य बनाए की हमे अपने जीवन की सच्चाई की सही पहचान कराए और सत्य के करीब लाए। 



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