प्रारब्ध
प्रारब्ध क्या है। जिंदगी में इंसान जो भुगत रहा है वहीं प्रारब्ध है। प्रारब्ध तो इंसान को भुगतना पड़ता है। वह टाले नहीं टल सकता। कई बार कई जगह यह देखने में आता है कि कोई इंसान बहुत अच्छा है फिर भी उसे अपनों से बार बार दुखी होना पड़ता है कष्ट सहना पड़ता है। दुख देने वाले ये रिश्ते शायद उसका प्रारब्ध ही है जो उसे भुगतना पड़ रहा है।
भगवान को कभी भी अपने कष्ट और दुखों के लिए जिम्मेदार नहीं मानना चाहिए। जो भी हमारा प्रारब्ध बन चुका है वह हमे सहर्ष स्वीकार कर भोगना चाहिए क्योंकि प्रारब्ध आज नहीं तो कल भोगना पड़ेगा। भगवान भी उसे मिटा नहीं सकते क्योंकि प्रारब्ध सात पाताल तक भी पीछा नहीं छोड़ता। हा यह अवश्य है कि सच्चे दिल से सही रास्ते पर चलते हुए भगवान की भक्ति करे तो भगवान हमे प्रारब्ध भोगने मैं हमारी सहायता अवश्य करते हैं।
हमारी सहन शक्ति बढ़ाते है और पीड़ा को कम करते हैं। इसीलिए प्रारब्ध से दूर मत होइए। इसे भुगत लो or कोशिश करो की अब आगे ऐसे कर्म करें ताकि और प्रारब्ध रचे ही नहीं। प्रारब्ध कटते ही मुक्ति को प्राप्त कर लेंगे।

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