कृपा

 सच्चे मन से भगवान को प्रेम करो तो उसकी कृपा का अनुभव हम अनेक बार कर सकते है। कृपा तो प्रभु सभी पर करते ही है मगर उसे महसूस वहीं कर सकता है जो कि प्रभु की सच्ची भक्ति करें।

भगवान कभी प्रकट नहीं होते हां मगर उसकी कृपा प्रकट है और इसी कृपा में मेरे उस प्रभु को देखों। सूरज की रोशनी में प्रभु की कृपा, चांद की रोशनी में प्रभु की कृपा, हवा, पानी में प्रभु की कृपा, हम देख सकते है, हम सुन सकते है, हम चल सकते है, हम कुछ कर पा रहें है क्या ये सब कृपा नहीं है।

जो भी ईश्वर दे, जैसे भी ईश्वर रखे, उसे भगवान की कृपा समझकर स्वीकार कीजिए, ईश्वर की कृपा बहुत बरसती है जरूरत है उसके लिए अपने आप को लायक बनाने की।

प्रभु तो सर्वत्र है हमारे सामने भी है हमारे आस पास हर जगह है मगर ए इंसान अपनी आत्मा पर पड़ी धूल साफ करो तो मेरे प्रभु नजर आयेंगे, ये वासनाओं के पर्दे हटाओं तो सामने मेरे भगवान साफ साफ नजर आयेंगे।

              गलत कर्म करके, ईश्वर की सत्ता को नकारता है तू

              मुसीबत में जब पड़े तो फिर क्यूं पुकारता है तू।

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