लक्ष्य
हर इंसान कुछ न कुछ पाना चाहता है, कुछ न कुछ जीतना चाहता है। इसमें कोई बुराई भी नहीं अगर सही रास्ते पर चलकर सही लक्ष्य पाने की कोशिश इंसान करे तो।
मगर केवल संसारिक चीजो या मनुष्यों के पीछे ही जिन्दगी बिता दी जाए यह बिल्कुल भी सही नहीं है। जिन्दगी का अंतिम लक्ष्य तो एक ही होना चाहिए और उसे ही ध्यान में रखते हुए हमें जीना चाहिए।
जिसने पूरे संसार को जीत लिया वास्तव में वो हारा हुआ है क्योंकि संसार तो नश्वर है, मिथ्या है। जैसे नींद से जागने पर स्वप्न मिथ्या लगने लगते है वैसे ही हमारी आंतरिक चेतना जाग्रत हो जाए तो हमें यह संसार भी स्वप्न की ही भांति मिथ्या लगने लगेगा।
असली विजेता वो है। जिसने संसार को नहीं, संसार बनाने वाले को जीता, जिसने इस सृष्टि के रचियता के मन को जीता। प्रभु को पाने के लिए हमे हमेशा सत् प्रयास करने चाहिए क्योंकि प्रभु सत्य है बाकी सब झूठ।
झूठ को जीता तो सब कुछ खोया और अगर सत्य यानी भगवान को जीता तो सब कुछ पा ही लिया।
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