संघर्ष
जिन्दगी में अगर सब कुछ हमारे ही हिसाब से होने लगे तो सोचो उस जिन्दगी के कोई मायने नहीं रह जाते है ने ही उसका कोई अर्थ रह जाता है। संघर्ष से ही हमें जिन्दगी का असली महत्व समझ में आता है। कोई भी चीज जैसे:- मटका, मटके जैसा तभी बन पाता है जब उसे आग में पकाया जाता है।
गेंहू को देखें, उसे साफ करो, फिर उसे पीसो, फिर गूंधो, फिर बेलो और फिर पकाओ तब वह रोटी बन पाता है। सोने को कितने चरणों से गुजरता पड़ता है तब कहीं जाकर उसके आभूषण बनते है। ऐसे ही प्रत्येक जिन्दगी का अस्तित्व तभी मजबूत बनता है जब कि वह अनेकों संघर्षो से जूझते हुए अपने आप को तराशे। ये जिन्दगी के संघर्ष हमें कमजोर नहीं बल्कि हमें परिपक्व और बुध्दिमान बनाते है। हमें संघर्षो से घबराना नहीं चाहिए।
जिंदगी का हर संघर्ष हमें एक नई सोच नया सबक सिखाता है।

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