सुख-दुख

 हर इंसान सुख चाहता है। दुख कोई नहीं चाहता मगर अधिकतर ना चाहते हुए भी सुख की बजाय दुख ही हमारी जिंदगी में ज्यादा आता है। जो सच्चे संत होते है उन्हें सुख दुख सब बराबर लगते है। उनके जीवन मे स्थायित्व रहता है सुख दुख उन्हें डगमगा या यों कहे कि सुख दुख उन्हें प्रभावित नहीं कर सकते। उनके लिए सुख दुख समान है। 

हम जैसे लोग दुख मिलते ही बड़े विचलित हो जाते है। और सुख मिलते ही बड़े फूल जाते है। लेकिन गौर करें जब भी सुख आता है अपने साथ अभिमान, प्रमाद आदि लाता है। और दुख जब आता है इंसान में सयानापन आ जाता है। इंसान में समझदारी विकसित होने लगती है। कई तरह की क्रिएटिविटी जाग्रत हो जाती है। जो विवेक बुध्दि सुख में महसूस नहीं हो पाती दुख में अचानक काम करने लग जाती है।


कुछ लोग दुख से घबराकर गलत रास्ते पे चल देते है। लेकिन ये याद रखना कि गलत रास्ते कभी सही जगह नहीं पहुचाँ सकते। सही रास्ते में परेशानियां बहुत आती है बहुत तरह के संघर्षो से सामना करना पड़ता है। संघर्षो का सामना करे पूरी सच्चाई के साथ। संघर्ष हमें मजबूत बनाते है और हम अपनी सही मंजिल तक पहुँचते बहुत से सबक भी सीख जाते है। जिंदगी तो सुख दुख के संगम का ही नाम है क्यों घबराना बस यही याद रखना- 

                             सुख मे फूलो मति                                                                  दुख मे भूलो मति                    

                  हर समय प्रभु का ध्यान करते चलो,                                          कृष्ण गोंविद गोपाल भजते चलो।

                                                       

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