जिदंगी का सच

 कभी भी अपने मन मे दूसरो के बुरे व्यवहार को ना रखें उसे भूल जाए, किसी के पापों को याद ना करे क्योंकि अगर हम दूसरों के पापों को, दूसरो के बुरे व्यवहार को याद रखेंगे तो उसका असर हमारे व्यवहार पर, हमारे कर्मो पर, हमारी सोच पर पर पड़ेगा। हम अपने व्यवहार को सुधारें अच्छे कर्म करें, अपनी सोच विचार पवित्र रखे और सब में उस परमात्मा का वास है। यह जानकर सबसे समभाव रखें।

हम इस समाज में सबको तो नहीं सुधार सकते क्योंकि ये तो स्वयं भगवान भी नहीं कर पाए थे तो हम स्वयं को सुधारे। जब तक अंदर से प्रेरणा नहीं जागेगी तब तक हम अपना उध्दार नहीं कर पायेंगे।

स्वयं अपने गूरू बनो और अपना उध्दार करो। आधी से ज्यादा जिन्दगी बिताने के बाद हमें जीवन का लक्ष्य, जीवन का मर्म समझने में आता है कई बार तो पूरी जिदंगी बीत जाती है। और हम कुछ भी जान नहीं पाते जिदंगी की सच्चाई के बारे में।


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